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Water is life

जल और जीवन एक हैं,
जल संचय तब जीवन संचय,
जब नभ देते जल उपहार,
नहीं संजोते, व्यर्थ गवांते,
और वाद मैं फ़िर पछताते.


जल का क्षय है जीवन का क्षय,
पानी का घटता जल स्तर,
सूखी नदियाँ, सूखी नहरें,
पानी किया प्रदूषित हमने,
हर घर मैं वीमार भरे हैं,
फ़िर भी नहीं बाज आते हम.
किसे बताएं, क्या समझायें?
सब हैं जानकार पर फ़िर भी,
अपने ही शत्रु बन बैठे,
काट रहें उस डाली को,
जिस पर बना बसेरा अपना.

तृतीय विश्व युद्ध जब होगा,
पानी उस का कारण होगा,
लिखते हैं और पढ़ते हैं हम,
एक दूजे से कहते हैं हम,
पर ख़ुद नहीं समझते हैं हम,
सर्वश्रेष्ठ रचना ईश्वर की,
मानव क्या से क्या बन बैठा,
जागो अभी समय है थोड़ा,
जल का संचय यदि करोगे,
तभी बचेगा मानव जीवन.


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2 Responses

  1. veerugcet says:

    Dear Sir,

    Bahut badhiya kavita likhi hai apne,

    Sir, maine apke kai blogs padhe, aap bahu badhiya likhte hai I also want to know more about you.

    regards

    Virendra

  2. MOKSHA says:

    LIFE CANNOT EXISIT WITHOUT WATER…..HOWEVER THE GREEDY & SELF CENTERED MAN HAS POLUTED NOT ONLY WATER BUT AIR TOO…..ALTHOUGH WE KNOW THE DANGERS OF POLUTION OF WATER & AIR BUT STILL WE ARE CARELES…..

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