Relationship between men and women 1

सदियों से नारी और पुरूष के संबंधों पर बहस चल रही है और सदियों तक चलती रहेगी. पुरूष नारी पर अत्याचार करते रहेंगे और नारी विकास पर भाषण देते रहेंगे. पर कोई भी उन कारणों की खोज नहीं करना चाहेगा जो समाज मैं नारी की दयनीय दशा के लिए जिम्मेदार हैं. मुझे कभी यह लगता है कि अधिकांश पुरूष नारी को सिर्फ़ भोग की बस्तु समझते हैं, और जब भी उन्हें मौका मिलता है अपने सोच को मूर्त रूप देने से नहीं चूकते. पिता द्वारा बेटी के बलात्कार की खबरें सुनकर और क्या साबित करने को रह जाता है?

मुझे दुःख तो तब होता है जब एक नारी ही दूसरी नारी की दुर्दशा की जिम्मेदार होती है. एक बूढ़ी सास या एक ननद जो कुछ दिन बाद सुसराल चली जायेगी, घर मैं आई नई बहू पर अत्याचार करती हैं. यह बूढ़ी औरत दहेज़ का क्या सुख भोगेगी? केवल यह डर कि बेटा या भाई अब उनके कंट्रोल से बाहर हो जाएगा, उन से यह अत्याचार कर बा देता है.

आज मैं अखवार मैं पढ़ रहा था, कि एक लड़की ने गुंडों को पैसे देकर उस लड़के पर तेजाब फिंकबा दिया जिसे प्रेम करने का वह दावा करती है और जिस ने उसके प्यार का अपेक्षित जबाब नहीं दिया था. समस्या दोनों तरफ है. यह सब एक नकारात्मक सोच का परिणाम है. अगर हम चाहते हैं कि हमारे समाज से यह समस्या ख़त्म हो तब हमें अपना सोच सकारात्मक बनाना होगा. प्यार का सही मतलब समझना होगा. प्यार देने का नाम है, लेने का नहीं. यह मानना होगा कि नारी और पुरूष मैं विवाह से पहले शारीरिक सम्बन्ध नहीं होने चाहियें. शारीरिक सम्बन्ध केवल पति पत्नी के बीच ही होने चाहिए. अन्य किसी सम्बन्ध को ईश्वर कि मान्यता नहीं है.

नारी को संगठित होना होगा. घर मैं खोया सम्मान दफ्तर मैं नहीं मिलेगा, उसे घर घर मैं ही पाना होगा. पति पत्नी एक दूसरे के पूरक हैं. कोई बड़ा या छोटा नहीं है, ऊंचा या नीचा नहीं है. कौन घर और कौन बाहर काम करता है यह एक व्य्बस्था का प्रश्न है. जब दोनों मिल कर अपनी जिम्मेदारियां पूरी करेंगे तभी परिवार मैं तरक्की होगे और शान्ति रहेगी.

मैं कहना चाहूँगा कि हम सब यह याद रखें – जहाँ नारी का सम्मान होता है वहाँ देवता निवास करते हैं.
जिन बच्चियों को हमारी माँ, पत्नी और बहन कंचक कह कर माँ के रूप मैं पूजती हैं, उन्हें ग़लत निगाह से देखना शक्ति माँ का अपराध है.