Real friends !!! 1

मैं चला जब कर्म पथ पर द्रढ निश्चय पर अकेला,
आ जुड़े हर जीत के संग मित्र इतने जैसे मेला.
जीत का आनंद सबको इतना भाया,
हार की संभावनाएं भूल बैठे,
और पहली हार पर घबरा गए सब,
दोष मेरा है येही सब मान बैठे.
काफिला घटता गया,
और मित्र निंदक हो गए,
जीत का आनंद लेने साथ आए,
हार पर सब बस उड़नछू हो गए.
आज के युग मैं यही हैं सच्चे मित्र,
दोस्ती और प्यार का मतलब,
बदल कर हो गया हैं स्वार्थसिद्धि,
हो मुबारक दोस्तों को दोस्ती,
मुझको आदत पड़ गई है,
कर्म पथ पर मैं चलूँगा अब अकेले,
जीत हो या हार हो,
क्या फर्क पड़ता,
कर्म करना है मुझे करता रहूँगा,
कर्म मेरा ही मुझे ले जाएगा,
परमात्मा तक,
और मैं मिल जाऊँगा उसमैं,
यही एक चाहना है.