दिल्ली मैं सड़को की गुणवत्ता

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दिल्ली मैं मूलचंद अंडर वाईपास देखा है आपने? यदि नहीं तो कभी उधर से गुजरें तब ध्यान दीजियेगा. कंक्रीट की बनी सड़क मैं लम्बी दरारें पड़ गई हैं. यह दरारें धीरे धीरे चौड़ी होती जा रही हैं. कुछ ही समय मैं यह दरारें गड्ढों मैं बदल जायेंगी. और फ़िर शुरू होगा मरम्मतों का एक न टूटने वाला सिलसिला. यह सिलसिला करेगा जेबें गर्म सबकी. सड़क बनाने मैं काफी जेबें गर्म हुई थीं. अब फ़िर से गरमी आएगी जेबों मैं. कौन कहता है ख़राब गुणवत्ता से किसी को फायदा नहीं होता.

नेताओं की जेबें गर्म होती हैं. वह आकर फीते काटते हैं, जो बना हैं उसे देश और जनता को समर्पित करते हैं. और यह सब वह ऐसे करते हैं जैसे इस सबमें उनका कोई योगदान है. ज्यादा केसेस मैं फीता काटने वाला नेता केवल चमचागिरी के लिए निमंत्रित किय जाता है. जिस नेता ने भी मूलचंद अंडर पास दिल्ली और जनता कोसमर्पित किया था उससे पूछा जाना चाहिए की यह सब क्या है? इन दरारों के लिए कौन जिम्मेदार है? उनके नाम का पत्थर लगा होगा वहाँ. अगली बार जब उधर से जाऊँगा तब देखूँगा पत्थर पर किस का नाम लिखा है?


Comments

hi

madhu_vamsi's picture

Yes the article is written in hindi & I am not fluent in Hindi because my mother tongue is telugu. But I have tried to read it and took some time. Thank u for a good nice one

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